Analysis of information sources in references of the Wikipedia article "कौरवी बोली" in Hindi language version.
पुरानी और मध्य ब्रज और अवधी भाषाएँ -ही जैसी विभक्तियाँ बरक़रार रखती हैं जबकि प्रतीत होता है कि खड़ी बोली (पुरानी हिंदी) और दक्खिनी ने अपभ्रंश काल में ही इन्हें गुमा दिया था।
लेकिन दिल्ली में मुस्लिम राज की शुरुआत के साथ इस क्षेत्र की पुरानी हिंदी फ़ारसी की प्रमुख जोड़ीदार बन गई। हिंदी की इस बोली को खड़ी बोली का नाम दिया गया।
... खड़ी बोली को निम्न क्षेत्रों में मातृभाषा के तौर पर उपयोग किया जाता है: (1) गंगा की पूर्वी ओर रामपुर, बिजनौर, बरेली और मुरादाबाद ज़िलों में, (2) गंगा और यमुना के बीच मेरठ, मुज़फ़्फ़रनगर, आज़मगढ़, वाराणसी, सहारनपुर और देहरादून ज़िलों में और (3) यमुना की पश्चिमी ओर दिल्ली और करनाल के शहरी क्षेत्रों और अंबाला ज़िले के पूर्वी हिस्से में ...
... जोशी ने सृजनात्मक ढंग से उत्तर भारत में बहुत उपयोग की जानेवाले देहाती हिंदी की खड़ी बोली को मानक हिंदी से मिलाया ...[मृत कड़ियाँ]
... शहरी लोगों की लिपि और बोलनेवाली भाषा ग्रामीण बोली या खड़ी बोली से भिन्न है। खड़ी गाँव के देहाती लोगों के अपरिष्कृत बोली है ...
... एक अभिलेख में खड़ी बोली की ब्रज भाषा की मधुर और कोमल प्रवाह के साथ तुलना की गई थी: खड़ी शब्द खड़ी बोली की कठोर और देहाती गति को जताता है। खड़ी बोली के पात्रों ने प्रशंसा लौटाई: ब्रज भाषा को पड़ी बोली पुकारा गया ...
... तथाकथित बोलियों के आधार पर हिंदी क्षेत्र के मानचित्र को फिर से बनाने ... वे मानते थे कि मेरठ और आगरा की बोली खड़ी बोली की वास्तविक माँ थी; उनहोंने से बोली को कौरवी नाम दिया ... 1948 में बॉंबे में आयोजित हिंदी साहित्य सम्मलेन में उर्दू भाषा के लिए देवनागरी लिपि के उपयोग की माँग करते हुए किए गए उनके भाषण ने विवाद उत्पन्न किया और उर्दू बोलनेवाले कम्युनिस्ट सदस्यों ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से उनके निष्काशन सुनिश्चित की ...
... जोशी ने सृजनात्मक ढंग से उत्तर भारत में बहुत उपयोग की जानेवाले देहाती हिंदी की खड़ी बोली को मानक हिंदी से मिलाया ...[मृत कड़ियाँ]